Social unity : सामाजिक एकता और संवैधानिक मान्यता को लेकर गूंजा संकल्प, जय बुढ़ादेव गांड़ा समाज अधिकार और सम्मान समारोह का हुआ समापन

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Social unity :  बिलासपुर। बिलासपुर जिले में रविवार को चिंगराजपारा स्थित गंधर्व समाज भवन में जय बुढ़ादेव गांड़ा समाज अधिकार एवं सम्मान समारोह संभाग स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक संभाग स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में प्रभाकर ग्वाल उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर समाज के वरिष्ठ नागरिक गणों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

Social unity : सामाजिक एकता और संवैधानिक मान्यता को लेकर गूंजा संकल्प, जय बुढ़ादेव गांड़ा समाज अधिकार और सम्मान समारोह  का हुआ समापन

कार्यक्रम का संयोजक रामशरण गंगे एवं संचालन सुखराम गंधर्व (शिक्षक) ने किया। सहा. श्रीराम सागर चौहान अति० राजेन्द्र दीप जी (शिक्षक )। वहीं बैठक की अध्यक्षता गंधर्व समाज के अध्यक्ष कौशिल्या गंधर्व ने की, वहीं समाज के सचिव राज कुमार गंधर्व भी मंचासीन रहे। वही मुख्य अतिथि और वरिष्ठ अतिथियों का समाज की ओर से श्रीफल, शॉल एवं पुष्पमाला पहनाकर भव्य सम्मान किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य वरिष्ठजन एवं मार्गदर्शकों को भी क्रमवार सम्मानित किया गया, जिससे पूरे सभागार में गौरव और उत्साह का वातावरण बन गया।

Social unity : सामाजिक एकता और संवैधानिक मान्यता को लेकर गूंजा संकल्प, जय बुढ़ादेव गांड़ा समाज अधिकार और सम्मान समारोह  का हुआ समापन

बैठक में क्षेत्रभर से आए पदाधिकारियों, वरिष्ठजनों और युवा सदस्यों ने एक सुर में यह संकल्प लिया कि गंधर्व समाज को दशकों से मिल रही उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि समाज को अनुसूचित, जन, जाति की सूची में शामिल करने की मांग अब आंदोलनात्मक स्वरूप में सरकार तक पहुंचाई जाएगी। उनका कहना था कि जब तक संवैधानिक मान्यता नहीं मिलेगी, तब तक समाज का समग्र विकास संभव नहीं है।

युवाओं को नेतृत्व की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर

युवाओं को नेतृत्व की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। प्रस्ताव रखा गया कि समाज स्तर पर युवा इकाई गठित की जाएगी जो आने वाले संघर्षों और आंदोलनों में अग्रिम पंक्ति की भूमिका निभाएगी। समापन में सभी सदस्यों ने एकजुट होकर यह संकल्प दोहराया कि आने वाले समय में गंधर्व समाज अपनी पहचान को न केवल सुरक्षित रखेगा बल्कि उसे सम्मान के साथ स्थापित भी करेगा।इसके साथ ही बैठक में सामाजिक सशक्तिकरण को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

Social unity : सामाजिक एकता और संवैधानिक मान्यता को लेकर गूंजा संकल्प, जय बुढ़ादेव गांड़ा समाज अधिकार और सम्मान समारोह  का हुआ समापन

तय किया गया कि समाज का हर सदस्य अपने-अपने गांव, वार्ड और शहर में सक्रिय भूमिका निभाएगा। सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी, अन्य समाजों से समन्वय और नई पीढ़ी को शिक्षा एवं तकनीकी कौशल से जोड़ना प्रमुख दिशा होगी।

मंच से उठे ये प्रमुख सवाल

बैठक में गांड़ा समाज के इतिहास, अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने से होने वाली सामाजिक क्षति तथा अनुसूचित जनजाति दर्जे के संभावित लाभों पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही “एक बैनर – एक मंच” नीति को लागू करने, धर्म परिवर्तन पर प्रतिबंध और प्रतिनिधि चयन की पारदर्शी प्रक्रिया को लागू करने पर सहमति बनी।

समापन में लिया गया यह संकल्प

सभी उपस्थित सदस्यों ने हाथ उठाकर यह संकल्प दोहराया कि समाज अब केवल दर्शक नहीं रहेगा, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकार, सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई को संगठित रूप से लड़ेगा। आने वाले दिनों में प्रतिनिधि मंडल शासन-प्रशासन तक अपनी मांगों को दस्तक देगा। गांड़ा समाज अब बदलाव के मुहाने पर खड़ा है — और यह सभा उसकी शुरुआत मानी जा रही है।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख प्रतिनिधि

लाखोदन कोटा से सुखराम गंधर्व, रामनिवास चौहान, जांजगीर-चांपा से सुखसागर चौहान, सक्ती जिलाध्यक्ष जितेन्द्र चौहान, सारंगढ़ के संरक्षक राजेन्द्र दीप और रामप्रकाश चौहान कबीरधाम के राधेश्याम गंधर्व, पंडरिया ब्लॉक अध्यक्ष गेंदलाल गंधर्व, रिसदा दिख्या चौहान, कोटा से रंजना चौहान, जांजगीर-चांपा आशा चौहान, से मनकी से भूखन गंधर्व, रामकुमार गंधर्व , राजेश गंधर्व, समेत 30 से अधिक सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

इन्होंने दिया उद्बोधन…

राजेन्द्र चौहान ‘गुरुजी’ (सरिया पंचधार), सुखराम गंधर्व (पंडरिया), श्रीमती रंजना गंधर्व (व्याख्याता, करगी रोड कोटा), रामकृष्ण चौहान (कोरबा), रामू गंधर्व एवं जितेन्द्र चौहान (शक्ति) शामिल रहे।

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