बच्चों की नजर से माता-पिता के प्यार की कहानी
‘बस एक छुट्टी’ ने मंच से दिया परिवार और संवाद का संदेश…

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डेस्क / नई दिल्ली। बच्चों की भावनाओं, उनके सपनों और अभिभावकों के प्रति उनकी सोच को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करने वाला बाल नाटक ‘बस एक छुट्टी’ 30 मई की शाम सैनी भवन, कड़कड़डूमा, दिल्ली में मंचित किया गया। प्रसिद्ध रूसी साहित्यकार Anton Chekhov की रचना ‘गिरगिट’ से प्रेरित इस नाटक को बच्चों के परिवेश और उनकी मनोस्थिति के अनुरूप तैयार किया गया। नाटक का डिजाइन एवं निर्देशन रंगकर्मी कंचन ने किया।

नाटक की कहानी एक ऐसे बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पढ़ाई, होमवर्क, और सख्त नियमों से परेशान होकर सिर्फ एक दिन की छुट्टी चाहता है। उसे लगता है कि मम्मी-पापा हमेशा उसे टोकते रहते हैं और सिर्फ पढ़ाई की बात करते हैं। इसलिए वह एक दिन अपनी मर्जी से जीने का सपना देखता है। मंच पर जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, बच्चे की नजर से दर्शक भी माता-पिता की सख्ती को देखते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह एहसास होता है कि बच्चों के बेहतर भविष्य की चिंता, उनके प्रति प्रेम और जिम्मेदारी ही माता-पिता के व्यवहार की असली वजह है। नाटक का सबसे प्रभावशाली पक्ष यही रहा कि उसने बिना किसी उपदेशात्मक शैली के रिश्तों की इस जटिल भावना को सहज और मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।

नाटक ने बहुत ही सरल और भावनात्मक तरीके से यह संदेश दिया कि कई बार बच्चे अपने माता-पिता की भावनाओं और उनके त्याग को समझ नहीं पाते। वहीं माता-पिता भी बच्चों की भावनाओं को समझने की कोशिश करें, तो रिश्ते और मजबूत बन सकते हैं। रंगमंच कार्यशाला के तहत तैयार किए गए इस नाटक में बच्चों ने शानदार अभिनय किया। उन्होंने मंच पर अपने किरदारों को इतनी सहजता से निभाया कि दर्शक कहानी से जुड़ गए। कार्यशाला के दौरान बच्चों ने अभिनय के साथ-साथ मंच संचालन, संवाद, बोलने और रंगमंच की कई बारीकियां भी सीखीं। कार्यक्रम के अंत में दर्शकों और अभिभावकों ने बच्चों की प्रस्तुति की खूब सराहना की। मनोरंजन के साथ एक अच्छा संदेश देने वाला यह नाटक बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए यादगार साबित हुआ। ‘बस एक छुट्टी’ ने यह संदेश दिया कि परिवार में प्यार, संवाद और एक-दूसरे को समझना ही रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत है।

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नाटक की कहानी एक ऐसे बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पढ़ाई, होमवर्क, और सख्त नियमों से परेशान होकर सिर्फ एक दिन की छुट्टी चाहता है। उसे लगता है कि मम्मी-पापा हमेशा उसे टोकते रहते हैं और सिर्फ पढ़ाई की बात करते हैं। इसलिए वह एक दिन अपनी मर्जी से जीने का सपना देखता है। मंच पर जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, बच्चे की नजर से दर्शक भी माता-पिता की सख्ती को देखते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह एहसास होता है कि बच्चों के बेहतर भविष्य की चिंता, उनके प्रति प्रेम और जिम्मेदारी ही माता-पिता के व्यवहार की असली वजह है। नाटक का सबसे प्रभावशाली पक्ष यही रहा कि उसने बिना किसी उपदेशात्मक शैली के रिश्तों की इस जटिल भावना को सहज और मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।

नाटक ने बहुत ही सरल और भावनात्मक तरीके से यह संदेश दिया कि कई बार बच्चे अपने माता-पिता की भावनाओं और उनके त्याग को समझ नहीं पाते। वहीं माता-पिता भी बच्चों की भावनाओं को समझने की कोशिश करें, तो रिश्ते और मजबूत बन सकते हैं। रंगमंच कार्यशाला के तहत तैयार किए गए इस नाटक में बच्चों ने शानदार अभिनय किया। उन्होंने मंच पर अपने किरदारों को इतनी सहजता से निभाया कि दर्शक कहानी से जुड़ गए। कार्यशाला के दौरान बच्चों ने अभिनय के साथ-साथ मंच संचालन, संवाद, बोलने और रंगमंच की कई बारीकियां भी सीखीं। कार्यक्रम के अंत में दर्शकों और अभिभावकों ने बच्चों की प्रस्तुति की खूब सराहना की। मनोरंजन के साथ एक अच्छा संदेश देने वाला यह नाटक बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए यादगार साबित हुआ। ‘बस एक छुट्टी’ ने यह संदेश दिया कि परिवार में प्यार, संवाद और एक-दूसरे को समझना ही रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत है।