कोल वाशरी की काली धूल से ग्रामीण परेशान , स्वास्थ्य, खेती और पर्यावरण पर गहरा रहा संकट, कल हिंद एनर्जी के जनसुनवाई में ग्रामीण खोलेंगे मोर्चा, WHO के अनुसार वायु प्रदूषण और हवा में मौजूद महीन कण मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा

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निशांत तिवारी

बिलासपुर। बिलासपुर जिले के कर्रा और आसपास के गांवों में कोल वाशरी से उड़ने वाली कोयले की धूल को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र में संचालित हिंद एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड की गतिविधियों से निकलने वाली धूल और प्रदूषण को ग्रामीण अपनी सेहत, खेती और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बता रहे हैं। उनका आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। हमारी टीम जब कर्रा, गतौरा, फरहदा, खैरा, लगरा और आसपास के गांवों में पहुंची तो ग्रामीणों ने बताया कि कोयले की महीन धूल अब उनके जीवन का हिस्सा बन चुकी है।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के अनुसार वायु प्रदूषण और हवा में मौजूद महीन कण मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। इनके लगातार संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी बीमारियां, अस्थमा, फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी, हृदय रोग, स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। WHO का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर प्रदूषण का प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।

बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है। डॉक्टर के अनुसार आंखों में जलन, लालपन और त्वचा संबंधी समस्याएं भी ऐसे प्रदूषण वाले क्षेत्रों में आम तौर पर देखी जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के स्कूल भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं। खुले मैदानों और स्कूल परिसरों में उड़ती धूल के कारण बच्चों को परेशानी होती है। अभिभावकों का आरोप है कि प्रदूषण का असर बच्चों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।

लोग मजबूरी में प्रदूषित वातावरण में जीवन जी रहे

ग्रामीणों का कहना है कि दिनभर उड़ने वाली धूल सांस के जरिए सीधे शरीर में जा रही है और लोग मजबूरी में प्रदूषित वातावरण में जीवन जी रहे हैं।ग्रामीणों के मुताबिक बीते कुछ वर्षों में खांसी, सांस फूलना, एलर्जी, आंखों में जलन और गले की परेशानी जैसी शिकायतें बढ़ी हैं। घरों की छतों, आंगनों, पेड़-पौधों, खेतों और यहां तक कि पीने के पानी के बर्तनों पर भी काली परत जम जाती है।

विस्तार योजना के विरोध में ग्रामीण खोलेंगे मोर्चा

इसी बीच हिंद एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड की प्रस्तावित विस्तार योजना ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। उनका कहना है कि जब वर्तमान में ही प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है, तब उत्पादन क्षमता बढ़ने से हालात और खराब हो सकते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय लोगों की आपत्तियों और पर्यावरणीय चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।

विकास के नाम पर हो रही अनदेखी

ग्रामीणों ने मांग की है कि क्षेत्र में प्रदूषण, स्वास्थ्य प्रभाव और जल स्रोतों की स्थिति का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष अध्ययन कराया जाए। उनका कहना है कि विकास के नाम पर गांवों की सेहत, खेती और पर्यावरण की अनदेखी नहीं की जा सकती। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी विस्तार योजना से पहले वर्तमान हालात की वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए और प्रभावित लोगों की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

खेती और जल स्रोतों पर भी असर

किसानों का कहना है कि कोयले की धूल खेतों तक पहुंच रही है, जिससे फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कई ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कृषि उत्पादन पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। वहीं भूजल स्तर में गिरावट और जल स्रोतों के प्रभावित होने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कई स्थानों पर पानी की उपलब्धता पहले की तुलना में कम हुई है और जल की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

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